यशस्वी जायसवाल खूब आगे बढिए, यसस्वी भवः!🔥❤️🇮🇳 !

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  • Category: news
  • Post date: .... 2020




दो साल पहले मुझे एक ऐसे बच्चे के बारे पता चला जो आजाद मैदान के बाहर पानी पूरी बेचा करता था। जानकार कह रहे थे कि तेंदुलकर, कांबली, रोहित और पृथ्वी शॉ के बाद ये बच्चा मुंबई क्रिकेट की सबसे बड़ी खोज है। उस बच्चे का नाम था— यशस्वी जायसवाल।
आधे घंटे की डॉक्यूमेंट्री बनाने के सिलसिले में मैंने यशस्वी और उसके कोच ज्वाला सिंह के साथ करीब ढाई दिन बिताये। मैंने उससे कहा— अपनी कहानी आराम से बताते जाओ जैसे बातचीत करते हो.. और वो बच्चा एक साँस में अपनी पूरी कहानी बता गया। मिर्ज़ापुर भदोही में घर है। पिताजी चौकीदार हैं और साथ एक छोटी दुकान भी चलाते हैं। क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन नहीं बन पाये। यशस्वी तेरह साल की उम्र में उनके साथ मुंबई आया था। उसने कहा— मैं कुछ भी करूंगा लेकिन वापस नहीं जाऊँगा, मुझे यहीं क्रिकेट खेलना है। पिता ने दिहाड़ी नौकर की तरह अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ रखवा दिया, जो डेयरी का काम करता था। क्रिकेट खेलकर 13 साल बच्चा थक जाता था और काम में हाथ नहीं बंटा पाता था। एक दिन रिश्तेदार ने सामान निकालकर बाहर फेंक दिया। उसके बाद यशस्वी चार महीने तक आज़ाद मैदान में अंजुमन इस्लामिया क्रिकेट क्लब के टेंट में सोया और ये सुविधा उसे एक ग्राउंडमैन के ज़रिये नसीब हुई जिसे हो वो चाचा कहता था। यशस्वी धारा-प्रवाह बोलता रहा— बरसात में बहुत दिक़्क़त होती थी। एक बार कीड़े ने काट दिया और आँख हफ़्ते भर तक सूजी रही। बारिश में बाथरूम बाहर जाना पड़ता था और कई बार रास्ते में ही हो जाता था।… और उसके बाद वो रो पड़ा। माँ की बात जब-जब आई वो बच्चा रोया। शूट के दौरान यशस्वी मुझे उस टेंट में भी ले गया और पानीपूरी स्टॉल पर भी जहां, काम करने पर उसे दिन-भर में 25-30 रुपये मिल जाते थे और खाने को अलग से।
कुछ दिन पहले यशस्वी ने अपना आईपीएल डेब्यू किया है। उसे राजस्थान रॉयल्स ने 2 करोड़ रुपये में खरीदा था। इस कामयाबी का श्रेय जितना उसे है, उतना ही उसके कोच ज्वाला सिंह को भी है, जिन्होंने एक तरह से उसे एडॉप्ट कर लिया। यशस्वी अब उन्हीं के साथ रहता है। ढाई दिन के उस शूट में ज्वाला सिंह ने एक पिता की तरह कई बार मुझसे कहा— इसे समझाइये मोबाइल-वोबाइल के चक्कर में ना पड़े। उनका मन रखने के लिए मैं ये कहता रहा कि ध्यान रखना शोहरत आदमी को भटकाता है, यशस्वी सुनता रहा और सिर हिलाता रहा।
ज्वाला बताते रहे— अंडर 19 में धूम मचा रहा है लेकिन अपने आप को सुपर स्टार ना समझने लगे इसलिए मैं इसे ग्रांडेड रखने की कोशिश करता हूँ। कभी-कभी सब्जी भाजी लाने भी भेज देता हूँ।
आईपीएल डेब्यू पर यशस्वी और उसके कोच ज्वाला सिंह को बहुत-बहुत बधाई। पहला मैच अच्छा नहीं रहा लेकिन यकीनन भविष्य सुनहरा है।
(~राकेश कायस्थ)
आजाद मैदान में गोलगप्पे बेचने से धोनी के साथ ग्राउंड शेयर करना, कभी ना हार मानने वाली जिद्द की मिशाल है। यसस्वी आप उम्र में भले हीं 19 साल के हैं पर हम जैसे लोगों के लिए आप का व्यक्तित्व किसी आदर्श से कम नहीं। खूब आगे बढिए, यसस्वी भवः!🔥❤️🇮🇳