मौजूदा भारत की असली तस्वीर👇👇

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  • Category: news
  • Post date: .... 2020




🤷‍♂🤷‍♂जब सत्ता की सनक सर चढ़कर बोलने लगती है तो वह इंसान को अपने मार्गों से भटका देती है। और इसका परिणाम यह होता है कि अनुशासन हीनता पर अफसर उतारू हो जाते हैं। मध्यप्रदेश के राजगढ़ में भाजपा के कार्यकर्ता CAA के समर्थन में सड़क पर मार्च कर रहे थे। वहां मौजूद डिप्टी कलेक्टर ने एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने लगीं। पुलिस और कार्यकर्ताओं के झड़प भी हो गयी। डिप्टी कलेक्टर निधि निवेदिता का आरोप यह है की उनके साथ अभद्रता हुई और उनकी चोटी तक खींची गयी। उस दौरान धारा144 लगी हुई थी उसके बावजूद प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए रैली निकाली गई। एक चीज देखिये किस हद तक अफसर शाही बढ़ चुकी है। 🤙🤙हाल के घटनाओं को देखिए जहां पर जिसकी सरकार है वह विपक्ष के पार्टी कार्यकर्ता और समर्थकों के ऊपर पुलिस बल का प्रयोग कर रही है। आसान भाषा में कहे तो पुलिस और अफसर सत्ता पर विराजमान लोगों पर एहसानमन्द हैं यानि कठपुतली बन चुके हैं। आज स्थिति ये हो चुकी है कि विश्वविद्यालय और भी अन्य शिक्षण संस्थान तक सुरक्षित नही है। चाहे बात जेएनयू की हो या जामिया कि या बनारस हिन्दू विश्विद्यालय की। जो जब चाह रहा जिसको राह उसपर हमला कर देता है। पुलिस की जिम्मेदारी कानून का पालन करना है। जबकि पुलिस ही हमलावर बन जाती है कुछ इस कदर हावी हो जाती है कि छात्रों के हाँथ पैर तक तोड़ देती है। 😎😎यह गनीमत ही रही है कि सत्ता के ऊपरी मुकाम पर बैठे माननीय लोग इन अफसरों से थप्पड़ नही खाए हैं। हाल में हो रही इन घटनाओं की कड़ी आलोचना भी करता हूँ। नेता जी लोग तो आपस में ही लड़ जाते हैं। इस हद तक लड़ते हैं जैसे कुत्ते हड्डी के लिए लड़ते हैं। जैसे पिछले साल ही यूपी के सन्तकबीरनगर में तत्कालीन सांसद साहब विधायक को जूते से मारने लगे थे। और भद्दी भद्दी गालियां भी देने लगे। और वहां मौजूद अफसर मूकदर्शक ही बने रहे। ऐसा नही है कि विधायक जी बदला नही लिए पर उतने जूते नही बरसा पाए जितना कि सांसद साहब। इतना ही नहीं एक बड़े नेता है उनके बेटे तो बल्ले से ही अफसर को मारने लगे थे। 🍻🍻न्यूज चैनल तक सुरक्षित नहीं है। जो पैनलिस्ट बुलाये जाते हैं डिबेट के लिए उनका भी कोई भरोसा नहीं कब क्या कर देंगे। वो लोग सिर्फ बोलते नही है माइक पटक देते हैं गालियां भी दे देते हैं। धमकियां भी देते हैं और उतना ही नहीं कॉलर पकड़ के छोटे बच्चों की तरह रगड़ भी देते हैं। खुलेआम कहते हैं कि नही सुधरोगे तो ठोकाओगे। कुछ तो आवेश में आ कर इस कदर बेकाबू हो जाते हैं कि एंकर को दलाल और पता नहीं क्या क्या बोल जाते हैं। हम यहां लिख भी नही सकते हैं। 👉👉👉इन सभी घटनाओं को सुनकर बुरा भी लगता है और हंसी भी आती है। यह कलाम साहब के 2020 का भारत है। अफसरों को ट्रेनिंग के साथ साथ चरित्र निर्माण का भी कोर्स कराया जाए ताकि वह खुद कानून को हाँथ में न ले। नेताओं के लिए भी क्रैश कोर्स होना चाहिए। अंत में यही कहेंगे भारत में भाँति भांति के लोग। धन्यवाद!🙏🙏🙏🙏 ~गौरव विशाल'किकु'