अभिषेक राठौर ने चार्टर्ड अकाउंटेंट(सनदी लेखाकार, सीए) की परीक्षा उत्तीर्ण की, बधाई

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  • Category: news
  • Post date: 3 feb, 2021




परिंदों को तालीम नही दी जाती उड़ानों की, वो खुद ही रास्ता बना लेते अपने आसमानों की

अभिषेक राठौर ने चार्टर्ड अकाउंटेंट(सनदी लेखाकार) आसान भाषा में बोले तो सीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर उपर्युक्त पंक्ति को चरितार्थ कर दिया है। हर तरफ बधाइयों का ताता लगा हुआ है। कैमूर जिले के मसौढा निवासी विश्वजीत सिंह के पुत्र है। अभिषेक की कहानी जिसके कानों तक जा रही वो खुशी के मारे गदगद हो जा रहे।
24 वर्षीय अभिषेक की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत और धैर्य का राज छुपा हुआ है। इन्होंने शुरुआती शिक्षा गाँव से हासिल की। फिर दसवीं तक की शिक्षा के लिएदिल्ली चले गए। उसके उपरांत इनका चयन सीएचएस वाराणसी में हुआ जहाँ 12वीं तक की पढ़ाई की फिर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय से स्नातक में टॉप करते हुए गोल्ड मेडलिस्ट रहे। जिसके बाद सीए की परीक्षा तैयारी के लिए दिल्ली में घोर तपस्या और एकाग्र के बदौलत आज ये मुकाम हासिल कर लिया।
अभिषेक ने 800 में से 463 अंक हासिल कर सीए की परीक्षा में सफलता हासिल की। दोनों समूहों में अंतिम परीक्षा देने वाले 19,284 छात्रों में से लगभग 14.5% ने इसे पास कर लिया। समूह I और समूह II के लिए सफलता दर क्रमशः 12.8% और 31% थी। 32,000 से अधिक छात्रों ने समूह I में अंतिम परीक्षा दी और 28,000 समूह II के लिए उपस्थित हुए। छात्रों के एक वर्ग के विरोध के बावजूद महामारी के दौरान शारीरिक रूप से अंतिम सीए की परीक्षा आयोजित की गई थी। कई लोग यात्रा और उनके आवंटित परीक्षा केंद्रों की स्थितियों से चिंतित थे। परीक्षाएं पिछले साल मई में आयोजित की जानी थीं, लेकिन लॉकडाउन के कारण इसे चार बार स्थगित कर दिया गया था, और आखिरकार नवंबर में आयोजित किया गया था।
अभिषेक की सफलता को शब्दों में पिरोया नही जा सकता। आज हर कोई इनकी मिसालें दे रहा। ऐसी कामयाबी हासिल करने वालों में ज्यादातर संपन्न परिवारों के होते हैं, लेकिन जब कोई युवा अपने मध्यम वर्गीय परिवार के हालात को पछाड़ते हुए देश की वाणिज्य क्षेत्र के सर्वोच्च मुकाम पर काबिज हो जाता है, पूरे समाज के लिए हीरो बन जाता है।वक्त ने उन्हें पीछे धकेलने में कोई कसर बाकी नहीं रखी लेकिन कड़ी मेहनत कर उन्होंने खुद अपना परचम फहरा दिया।
लोग अक्सर कहते हैं कि दो लोगों के बच्चों को अवश्य पढ़ना चाहिए एक शिक्षक और दूसरा किसान। आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि अभिषेक के पिता विश्वजीत सिंह भी पेशे से शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जैसे ही ICAI ने एक फरवरी को परिणाम जारी किया और अभिषेक राठौर की सफलता की खबर मिली, हर कोई बधाई दे रहा, कोई फेसबुक व्हाट्सएप से, तो कोई दूरभाष पर। आखिर कोई बधाई दे भी क्यों ना उनके घर,रिश्तेदार,गाँव,जिले के लाडले ने अपरिभाषित कीर्तिमान जो स्थापित कर दिया है।
धन्यवाद!

~ Gaurav Vishal Kiku